इस शोध संस्थान की भौगोलिक स्थिति यह है कि चारों ओर से बागमती नदी से घिरे बिल्कुल निर्जन स्थान पर अवस्थित है। इस संस्थान परिसर में विभिन्न प्रजातियों के फलदार वृक्ष यथा आम, लीची, बेल, कटहल आदि के पेड़-पौधों से सुसज्जित हैं, जिससे बिहार सरकार को प्रति वर्ष फलों/गड्ढों की बन्दोवस्ती एवं सूखे वृक्षों की नीलामी से लाखों रुपये राजस्व की प्राप्ति होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Explore More

प्रकाशन अनुभागः

प्रकाशन अनुभाग द्वारा दुर्लभ ग्रन्थों का प्रकाशन, सम्पादन का कार्य स्थापना काल से किया जा रहा है। जिसमें अबतक 108 से अधिक दुर्लभ पुस्तक का प्रकाशन किया जा चुका है।

पाण्डुलिपि अनुभागः

इस अनुभाग में मिथिलाक्षर, बंगलाक्षर, देवनागरी तथा अन्य लिपियों में तंत्र, व्याकरण, ज्योतिष, कर्मकाण्ड, मीमांसा, न्याय, न्याय वैशेषिक, वेदान्त, वेद, आयुर्वेद, कामशास्त्र, साहित्य आदि प्राच्य विद्या विषयों में लगभग 12,377

एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

संस्कृत एवं अन्य भारतीय भाषाओं का साहित्य और स्वाधीनता आंदोलन(ऑनलाइन / ऑफलाइन) पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 12 जनवरी 2026 आयोजकमिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान. महेशनगर, दरभंगा (उच्च