इस शोध संस्थान की भौगोलिक स्थिति यह है कि चारों ओर से बागमती नदी से घिरे बिल्कुल निर्जन स्थान पर अवस्थित है। इस संस्थान परिसर में विभिन्न प्रजातियों के फलदार वृक्ष यथा आम, लीची, बेल, कटहल आदि के पेड़-पौधों से सुसज्जित हैं, जिससे बिहार सरकार को प्रति वर्ष फलों/गड्ढों की बन्दोवस्ती एवं सूखे वृक्षों की नीलामी से लाखों रुपये राजस्व की प्राप्ति होती है।

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छात्रवृत्ति

संस्थान में अध्ययनरत एम०ए० संस्कृत के छात्रों को नामांकन की तिथि से सत्रांत तक प्रतिमाह 500/- (पाँच सौ रूपये) मात्र की छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। पी-एच०डी० एवं डी० लिट्

प्रकाशन अनुभागः

प्रकाशन अनुभाग द्वारा दुर्लभ ग्रन्थों का प्रकाशन, सम्पादन का कार्य स्थापना काल से किया जा रहा है। जिसमें अबतक 108 से अधिक दुर्लभ पुस्तक का प्रकाशन किया जा चुका है।

पाण्डुलिपि अनुभागः

इस अनुभाग में मिथिलाक्षर, बंगलाक्षर, देवनागरी तथा अन्य लिपियों में तंत्र, व्याकरण, ज्योतिष, कर्मकाण्ड, मीमांसा, न्याय, न्याय वैशेषिक, वेदान्त, वेद, आयुर्वेद, कामशास्त्र, साहित्य आदि प्राच्य विद्या विषयों में लगभग 12,377